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مسرحية الجارية والنخاس// د. ميسون حنا

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د. ميسون حنا

 

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مسرحية الجارية والنخاس

د. ميسون حنا

 

شخصيات المسرحية

الجارية

النخاس

أم الفضل

إبن الكحال

 

اللوحة الأولى

 (في بيت أم الفضل. أم الفضل والجارية تتحدثان)

أم الفضل    : سامحيني يا ابنتي.

الجارية      : لن أنسى حسن معاملتك لي.

أم الفضل    : أحيانا كنت أنسى أنك لست من صلبي، وفي غمرة نسياني أضمك إلى صدري، وأعيش إحساس الأمومة بصدق متناسية أني امرأة عاقر، هجرها زوجها فباتت تعيش وهم الأمومة معك، والوهم جميل يا ابنتي، كنت سعيدة بأوهامي التي صدقتها ... (منفعلة) بل هي حقيقة وليست وهما، أنت ابنتي ولست جاريتي (متأثرة) ربيتك طفلة ... أنت ابنتي ... ابنتي.

الجارية      : (متأثرة) أماه ...

أم الفضل    : (بحزن) الأم لا تبيع ابنتها (تصرخ) أنا عجوز شمطاء إذ أفعل هذا.

الجارية      : أعلم أنك في ضائقة، وأنا أقدم نفسي لأنتشلك من الضياع ... أفعل هذا بسرور، لا تحزني.

أم الفضل    : ولكني أنانية إذ أبحث عن طريقة لخلاصي بعد أن أرميك بين يدي نخاس خبيث.

الجارية      : (مفتعلة المرح) هل سأعجبه؟

أم الفضل    : لا تزيدي في كربي.

الجارية      : (متمالكة) أجيبي، هل سأنال إعجابه؟

أم الفضل    : (تنظر إليها بحنان) أنت جميلة الجميلات في نظري.

الجارية      : كل أم معجبة بابنتها.

أم الفضل    : تنعتيني أمك؟ لست حاقدة علي؟

الجارية      : أفتديك بروحي.

أم الفضل    : لن تكوني أكرم مني (بحماس) لن أبيعك، لقد تراجعت.

      (يدخل النخاس، تنظران إليه بقلق. النخاس ينظر للجارية بإعجاب)

النخاس      : هذه هي الجارية التي حدثتيني عنها؟

أم الفضل    : (تضم الجارية) لا ... ليست هي.

      (الجارية تتفلت من أم الفضل وتقترب من النخاس)

الجارية      : بل أنا هي .

      (تدور أمامه بأسلوب استعراضي. يتأملها بانبهار)

النخاس      : (لأم الفضل) سأجعل منها تحفة فنية يتمنى حيازتها أثرى الأثرياء.

أم الفضل    : هي ليست للبيع.

الجارية      : بل للبيع.

أم الفضل    : لن أسامح نفسي على فعلتي هذه.

الجارية      : الحاجة تبيح المحذورات.

أم الفضل    : لا ... (تسحب الجارية نحوها) (النخاس يمسك يد الجارية ويسحبها إلى ناحيته)

النخاس      : صدقت البنية ... (ينظر إلى أم الفضل)سأوافيك بالثمن بعد أن أبيعها لثري يقدرها حق قدرها، ويزيد في ثمنها.

أم الفضل    : (تبكي) لا تقس عليها، هي بمثابة ابنتي.

      (يتحرك نحو الخروج، ممسكا بيد الجارية)

أم الفضل    : مهلا... (يلتفتان إليها) إختر لها مالكا تقيا، ورعا ليحسن معاملتها.

النخاس      : إطمئني، زبائني من علية القوم.

أم الفضل    : ليكن تقيا، ورعا.

النخاس      : (حالما) طائل الثراء... (للجارية) هيا...  (يسحبها من يدها وينطلقان خارجا)

      ( أم الفضل تبكي)

 

****

 

اللوحة الثانية

 (في بيت النخاس، النخاس يبدو ساهم النظرات، شارد الفكر، تدخل الجارية في أبهى حلة، ما أن تقع نظرات النخاس عليها حتى يبدو منفعلا، لحظات ثم يتمالك ويفتعل العبوس، الجارية تلحظ ذلك، تضحك بمكر)

النخاس      : ما يضحكك الآن؟

الجارية      : أنت.

النخاس      : (بعجب) كيف؟

الجارية      : (متجاهلة سؤاله) أنا جاهزة.

      (يتأملها وكأنه يعاينها)

النخاس      : ليس بعد.

الجارية      : ماذا تريد إذن؟

النخاس      : أريد أن أنتهي من إعدادك قبل عرضك في السوق.

الجارية      : مضى شهر بحاله وأنت تقول ذات العبارة.

النخاس      : ماذا أفعل وأنا أراك على ما أنت فيه من... (يصمت فجأة)

الجارية      : من جاذبية وجمال.

النخاس      : هذا لا يكفي.

الجارية      : وكأنك تماطل؟

النخاس      : أريد أن أصنع منك تحفة فنية.

الجارية      : أو لم تصنع بعد؟ (تضحك ثم تدور حول نفسها ) أنا الآن أبدو في أبهى صورة، ما أن نصل السوق حتى يتهافت علي المعجبون. (النخاس يبدو منفعلا، الجارية تواصل)

الجارية      : ستكون المنافسة قوية.

النخاس      : (منفعلا) كفى ... لن يكون هذا أبدا.

الجارية      : (بمكر) وما المانع؟ سيرتفع الثمن.

      (النخاس ينظر إليها نظرات خاصة) (لحظات)

الجارية      : (بمكر) نظراتك تقول أشياء وأشياء.

النخاس      : (يشيح بوجهه عنها) قد تكذب النظرات أحيانا.

الجارية      : (بمكر) ها أنت قلت... أحيانا... وماذا عن الأحايين الكثيرة التي أضبطك فيها وأنت تلتهمني بنظراتك؟

النخاس      : (يتحدث وهو معرض عنها) هذا يخيل لك فقط.

الجارية      : لا تهرب بنظراتك عني.

النخاس      : كفى مزاحا.

الجارية      : أقول لك أنظر إلي.

      (النخاس يلتفت إليها ثم يشيح بنظره عنها سريعا)

الجارية      : أرأيت؟ أنت لا تحتمل التقاء نظراتنا.

      (النخاس ينظر إليها بتحد. الجارية تضحك)

الجارية      : أنت تراوغني.

النخاس      : حسنا ... أنت تعجبينني ، هل هذا ما أردت أن تعرفيه؟

الجارية      : (بارتياح) وماذا بعد؟

النخاس      : من الطبيعي أن أعجب بكن، فأنا أجري عليكن تغييرات أضع فيها لمساتي حتى تشرقن، وتصبحن بهجة للشاري... أنت بالذات ألبستك هذا الثوب الذي يُبرز مفاتنك، وزينتك لتكوني صورة جميلة يستلطفها كل من يراها.

الجارية      : وأتقنت صنعا، أنظر...

      (تدور أمامه بأسلوب استعراضي)

النخاس      : لست أنا من سيعاينك حقيقة، إنما...

الجارية      : الشاري من سيفعل هذا، أعلم.

النخاس      : (بقلق) هل حقا ترغبين أن أذهب بك إلى السوق؟

الجارية      : أوليست هذه مهنتك؟

النخاس      : بئست من مهنة.

الجارية      : لا تحبها؟

النخاس      : على يديك كرهتها.

الجارية      : (بعجب) لم؟ ماذا بدر مني حتى تكرهها؟

النخاس      : الكثير... (ينظر إليها بوله) أنت أول جارية تعذبني.

الجارية      : أنا أفعل هذا؟!

النخاس      : (متمالكا) أكرر سؤالي: هل حقا ترغبين أن أذهب بك إلى السوق؟

الجارية      : (بمكر) أظن أنك لأجل هذا جئت بي إلى هنا.

النخاس      : وكأنك تستعجلين الأمر؟

الجارية      : (مرتبكة) لا ... ولكن ...

النخاس      : (ينظر إليها بارتياح، ثم يواصل بخبث) سنذهب إلى السوق، ولكن ليس الآن.

الجارية      : (مجروحة) بل الآن، هيا (تمسك يده)

      (النخاس يسحبها من يدها ويجلسها إلى جانبه)

الجارية      : ما معنى هذا؟

النخاس      : لن نذهب اليوم لاعتلال مزاجي.

الجارية      : أنت تفتعل الأعذار للتأجيل كالعادة.

النخاس      : بل إن مزاجي معتل.

الجارية      : وما دخل مزاجك الآن؟

النخاس      : (مراوغا) المزاج هو الأساس، عندما يتقدم أحد الشارين وأنا في مزاج رائق،   أجادله، وأفاصله، وأزين له ميزاتك، وصفاتك، فيرتفع الثمن، أما إذا كنت معتل المزاج لا أحسن انتقاء الكلمات ولا مداهنة الشاري ومسايرته، فيعدل عنك ، أو يخفض الثمن.

      (تنظر إليه بحزن)

الجارية      : (بانكسار) لأجل هذا إذن أنت تؤجل؟

النخاس      : (بمكر) وماذا كنت تظنين؟

الجارية      : (بحزن) الربح هو ما يهمك.

النخاس      : (بمكر) وما يهم التاجر غير ربحه وفائدته.

الجارية      : (بتحد) هيا إلى السوق.

النخاس      : لا ، لن نذهب.

الجارية      : لاعتلال مزاجك كما تزعم؟

النخاس      : لا ولكن ... (ينظر إليها بحب) لو دُفع فيك مال الدنيا ما ووفيت قدرك، أنت بالنسبة لي ثروة حقيقية.

الجارية      : الثمن والثروة ، هذا ما يهمك.

      (لحظة. يتبادلان النظرات)

النخاس      : لا يا شيماء، لا ، ولكني متردد في بيعك.

الجارية      : لماذا؟ لتزيد في السعر؟

النخاس      : (منفعلا) بل لأستبقيك قربي، هل فهمت الان؟

      (الجارية تبدو مرتبكة، يحاول ضمها إليه فتنأى عنه جانبا)

النخاس      : ما معنى هذا؟

الجارية      : ليس بعد.

النخاس      : أنا أحبك.

الجارية      : أنت تعشق جسدي ليس إلا.

النخاس      : بل أعشقك أنت.

الجارية      : (بمكر) ونهاية العشق الزواج.

      (النخاس يضحك باستهتار، تنظر إليه متألمة)

النخاس      : أنا أتزوج من جارية؟

الجارية      : (بتحد) بعد أن تعتقها.

النخاس      : تطلبين المستحيل.

الجارية      : أنت لا تحبني إذن.

النخاس      : أحبك، لكن الزواج ليس في ذهني.

الجارية      : (بتحد) هيا إلى السوق.. الآن.

النخاس      : (بحزم) أنا من يقرر متى نذهب إلى السوق؟

      (ييتبادلان النظرات بتحد)

 

****

 

اللوحة الثالثة

 (في بيت النخاس. النخاس والجارية يتحدثان)

النخاس      : أوتظنين أني لا أستطيع إخضاعك لرغباتي؟

الجارية      : (بتحد) بلى تستطيع.

النخاس      : ولكني لا أريد هذا عنوة.

الجارية      : ها أنت قلت.

النخاس      : ولكن إذا تماديتِ في تمنعك سأفعل أي شيء.

      (ينظر إليها وهي تبادله النظرات بثبات)

النخاس      : لا تنظري إلي هكذا، أستطيع أن أرغمك.

الجارية      : لو أردت اغتصابي ستتغلب علي بقوتك، لا جدال في هذه الحقيقة، ولكن هل تسمي هذا نصرا؟ (بتحد) أتسميه نصرا؟

      (النخاس ينظر إليها بتحد وصمت، تواصل)

الجارية      : لا يا عزيزي، لن يكون هذا سوى هزيمة نكراء.

      (النخاس يضحك بسخرية)

الجارية      : أما عندما أكون مستعدة للاستجابة لك نفسيا، وعاطفيا، وأخلاقيا تكون قد سجلت انتصارك وبجدارة.

النخاس      : وما يمنعك من قبولي؟

الجارية      : أنت تعلم السبب.

النخاس      : لا أريد اغتصابك يا شيماء لأني أحبك، وأنت تؤلمينني إذ ترفضين وصالي.

الجارية      : الطريق إلى وصالي العتق.أستطيع.

الجارية      : العتق هو الطريق الوحيد.

النخاس      : العتق ثم الزواج؟

الجارية      : نعم لو كنت تحبني.

النخاس      : طلبك عسير.

الجارية      : حبك لي مزيف إذن.

النخاس      : بل حقيقي، ولكنك جاحدة، هكذا أنتن أيتها النساء، عندما تستشعرن عاطفة من قِبلنا تتمنعن، ولكني سأكسر هذه القاعدة اليوم، ولن يثنيني عنك أي عذر.

      (ينظر إليها باشتهاء. الجارية تتراجع للخلف بحذر، يتقدم نحوها بينما يُقرع الباب. الجارية تهرع نحو الباب، يحاول منعها ، لكنها تفتح الباب بسرعة، يدخل إبن الكحال، الجارية تنظر للقادم باهتمام. النخاس يبدو منفعلا ثم يتمالك، وينظر لابن الكحال ببرود. إبن الكحال ينظر إلى الجارية بتمعن ثم يلتفت إلى النخاس)

ابن الكحال   : ألا ترحب بي؟

النخاس      : (متمالكا تماما) أهلا بابن الكحال، صديقي، أهلا بك.

الجارية      : (مع نفسها) هو أنت إذن، لقد عرفتك.(تنظر إليه باستغراب، ابن الكحال لا ينتبه لردة فعلها تجاهه ويتأملها بفضول وإعجاب)

ابن الكحال   : ذاع صيتك أيتها الجارية.

الجارية      : أنا؟ كيف؟

ابن الكحال   : الألسنة تلهج بذكرك ليل نهار. (للنخاس) يقولون أن النخاس يحتجز في بيته جارية لم يسبق أن عُرض مثلها في السوق، يحتجزها ليزيد في ثمنها.

النخاس      : (يضحك) هكذا يقال إذن؟

ابن الكحال   : (ينظر للجارية باعجاب) وأنا أرى أنهم على حق. (للجارية) يقال الخيال أجمل من الواقع، وأنا رسمت لك صورة في خيالي قبل أن آتي لأراك بأم عيني أجمل مما تصورت. أنت حلم أيتها الجارية، أعني جميلة كالحلم. (يلتفت إلى النخاس ثم يتابع بحماس) حدد سعرك، فأنا اشتريت.

      (الجارية تنظر للنخاس باهتمام، النخاس يبدو مرتبكا)

النخاس      : (مترددا) هي ليست للبيع يا صديقي.

ابن الكحال   : لن تجد أحدا يدفع أكثر مما أعرضه عليك، أنا ابن الكحال، أثرى أثرياء البلدة، لا تنس.

النخاس      : ولكن هي ليست للبيع.

ابن الكحال   : (بإغراء) ألف دينار.

      (النخاس تبرق عيناه)

النخاس      : (مترددا) لا ... لا .

ابن الكحال   : ألفان.

      (النخاس ينظر للجارية بحب ثم ينظر إلى ابن الكحال)

النخاس      : لا يا صديقي، ليست للبيع.

      (الجارية تنظر إلى النخاس بارتياح وسرور)

ابن الكحال   : ثلاثة آلاف دينار، ولن أزيد عليها.

      (النخاس يبدو حائرا، ابن الكحال يضع المال أمامه)

ابن الكحال   : هاك.

      (ابن الكحال يمسك يد الجارية التي تنظر إلى النخاس الذي يشيح بوجهه عنها وينظر للمال بانبهار. الجارية تبدو حزينة، تدمع عيناها)

ابن الكحال   : فيم هذه الدموع؟

الجارية      : تمهل يا عماه.

ابن الكحال   : أنا سيدك يا هذه، ولست عمك.

الجارية      : إنتظر (تشير للنخاس) هو لم يبد موافقته بعد.

ابن الكحال   : بل هو موافق.

      (النخاس يضم المال بيديه بجشع ولا يلتفت اليهما. الجارية تبكي. ابن الكحال ينظر إليها باستغراب)

ابن الكحال   : (برفق) هيا معي.

      (الجارية تنظر إلى النخاس بألم)

ابن الكحال   : دعيه مع أحلامه وهيا نغادر.

الجارية      : (متمالكة) ليس قبل أن تعرف من أكون.

ابن الكحال   : أنت جاريتي، وهذا هو المهم الآن.

الجارية      : أنا شيماء.

ابن الكحال   : اسمك شيماء؟

الجارية      : ألا يلفت انتباهك اسمي؟

ابن الكحال   : أنت ثرثارة على ما يبدو.

الجارية      : أقول لك أنا هي شيماء.

ابن الكحال   : وماذا بعد؟ سيان كان اسمك...

الجارية      : شيماء ربيبة أم الفضل زوجتك التي هجرتها.

      (ابن الكحال ينظر إليها بدهشة بينما يسمع طرق على الباب، النخاس لا يزال ينظر للمال بجشع، الجارية تفتح الباب لتدخل أم الفضل)

أم الفضل    : شيماء... أبنتي (تحتضنها) أين هو؟ (تلتفت إلى النخاس، هي حتى هذه اللحظة لا تنتبه لتتعرف إلى ابن الكحال الذي تلمحه ولا تميزه، ولا توليه اهتماما. ابن الكحال يلتزم الصمت ويراقب بانتباه ما سيحدث)

أم الفضل    : (للنخاس) جئت أستعيدها، لم أعد أرغب في البيع.

النخاس      : (ينظر إليها) أم الفضل !... فات الأوان، لقد بيعت وسأوافيك بالثمن كما وعدتك.

أم الفضل    : لا أريد مالا، أريدها هي، لم أعد أطق فراقها.

النخاس      : (يشير إلى المال) أنظري، سنتقاسمه كما جرت العادة.

أم الفضل    : ومن الشاري؟ أنت تكذب ، هي هنا الآن (تلتفت لابن الكحال، تبدو منفعلة عندما تراه وتتعرف إليه كما يبدو من تعابيرها، ابن الكحال صامت، تنظر أم الفضل إليه بشك)

أم الفضل    : أنت ؟!

ابن الكحال   :نعم ... اشتريتها يا أم الفضل، ولكني لم أكن أعلم أنها شيماء.

أم الفضل    : شيماء... هي شيماء.

      (ابن الكحال ينظر للجارية بحنان)

ابن الكحال   : كنت أحملك بين ذراعي وأداعبك كابنتي، ولكن أنت الآن جاريتي.

الجارية      : وأنت بمثابة أبي الذي لم أعرفه.

ابن الكحال   : (مفكرا، لحظات) سأهبك لأم الفضل.

الجارية      : لا يا عماه ... لا.

أم الفضل    : حبيبتي، ماذا تريدين إذن؟

الجارية      : بحق البنوة أخضع لك، ولكني لا أستطيع أن أعود إليك بصفتي جارية.

      (النخاس أخيرا يلتفت إليهم ويتابع الحوار بصمت)

ابن الكحال   : (للجارية) ماذا تريدين يا ابنتي؟

أم الفضل    : سامحيني إذ بعتك، ولكني أنبت نفسي كثيرا، والآن أريد أن أستعيدك، وابن الكحال لا يخيب أملنا.

الجارية      : لست سعيدة بهذه النهاية.

ابن الكحال   : ماذا تريدين يا ابنتي؟ أكرر سؤالي.

الجارية      : العتق مطلبي، أريد أن أكون حرة.

ابن الكحال   : وأنا وهبتك حريتك.

      ( الجارية تنظر إليه بانفعال)

ابن الكحال   : أنت حرة، حرة، حرة.

      (الجارية تبدو جذلى، تحتضن أم الفضل، وتضخك. النخاس ينظر إليها بسرور)

النخاس      : أخيرا نلت حريتك يا شيماء؟

      (الجارية تنظر إليه باستهزاء وحزن)

النخاس      : فيم عبوسك الآن ... أنت حرة.

الجارية      : عندما كنت أعيش في بيت أم الفضل، لم أكن أشعر أني جارية، لم أشعر بالتبعية، ولكن عندما أتيت إليك اختلف الأمر، وأدركت ما حقيقة أن تكون المرأة مسلوبة الإرادة... أنا الآن أنا حرة ... حرة ... حرة ، هل تفهم؟

النخاس      : وأنا الآن أعرض عليك الزواج.

الجارية      : (باستهزاء) أنا أتزوجك أنت؟

النخاس      : أليس هذا هو طلبك؟

الجارية      : كان مطلبي، والآن أرفضك.

النخاس      : (بدهشة) ألست القائلة : العتق ثم الزواج.

الجارية      : لست أنت من وهبني حريتي.

النخاس      : ما الفرق، أنت حرة الآن (ينظر للمال) والمال معنا.

الجارية      : نعم أنا حرة ... حرة، ولن أتيح لك خيار امتلاكي ... أنا حرة وسعيدة بحريتي ... أشكرك يا عماه، أشكرك من أعماق قلبي (بسرور) أنا حرة ... حرة...

      (تغادر المكان. أم الفضل تنظر إليها بذهول)

أم الفضل    : إلى أين؟ (تتبعها وتغادر هي الأخرى) (لحظات) ( ابن الكحال يغادر بصمت) (النخاس ينظر في اثرهم بذهول، يبدو ساهما، حزينا، يصرخ) شيماء... (ينعف النقود في الهواء فتسقط على الأرض وهو يضحك بهستيرية، لحظات ثم ينهار ويتحول ضحكه الى نشيج وبكاء)

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